राघवाय च संन्यासं दत्त्वेमे वरपादुके।
राज्यं चेदमयोध्यां च धूतपापो भवाम्यहम्॥ २०॥
अनुवाद
'इस राज्य, अयोध्या और मेरे पास धरोहर के रूप में रखी इन महान पादुकाओं को श्री रघुनाथजी की सेवा में समर्पित करके मैं सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाऊँगा॥20॥
'By dedicating this kingdom, Ayodhya and these great Padukas, kept with me as a heritage, to the service of Shri Raghunathji, I will be freed from all kinds of sins. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥