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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना
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श्लोक 14
श्लोक
2.115.14
एतद् राज्यं मम भ्रात्रा दत्तं संन्यासमुत्तमम्।
योगक्षेमवहे चेमे पादुके हेमभूषिते॥ १४॥
अनुवाद
‘मेरे भाई ने मुझे यह अद्भुत राज्य विरासत में दिया है; उसके स्वर्ण-मंडित चरण सबका कल्याण करेंगे।’ ॥14॥
'My brother has given me this wonderful kingdom as a heritage; his golden-decorated feet will take care of the welfare of everyone.' ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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