श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 115: भरत का नन्दिग्राम में जाकर श्रीराम की चरणपादुकाओं को राज्य पर अभिषिक्त करके उन्हें निवेदन पूर्वक राज्य का सब कार्य करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.115.13 
भरतस्तु तत: क्षिप्रं नन्दिग्रामं प्रविश्य स:।
अवतीर्य रथात् तूर्णं गुरूनिदमभाषत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शीघ्र ही नन्दिग्राम पहुँचकर भरतजी तुरन्त रथ से उतर पड़े और अपने अग्रजों से इस प्रकार बोले-॥13॥
 
Arriving at Nandigram soon after, Bharata immediately alighted from the chariot and spoke to his elders as follows:॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)