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श्लोक  2.114.6 
विध्वस्तकवचां रुग्णगजवाजिरथध्वजाम्।
हतप्रवीरामापन्नां चमूमिव महाहवे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय अयोध्या ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो किसी महायुद्ध में संकटग्रस्त सेना हो, जिसके कवच कटे हुए हों, हाथी, घोड़े, रथ और ध्वजाएँ टुकड़े-टुकड़े हो गई हों तथा मुख्य योद्धा मारे गए हों।
 
At that time Ayodhya appeared like an army in distress in a great war, with its armour cut off, elephants, horses, chariots and flags torn to pieces and the main warriors killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)