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ramayan 2.114.21: 'अच्छे सवारों की आवाजें, घोड़ों की हिनहिनाहट की मधुर ध्वनि, मतवाले हाथियों की तुरही और रथों की बड़ी-बड़ी घरघराहट - ये सब सुनाई नहीं देतीं।   |   ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.114.21 
यानप्रवरघोषश्च सुस्निग्धहयनि:स्वन:।
प्रमत्तगजनादश्च महांश्च रथनि:स्वन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'अच्छे सवारों की आवाजें, घोड़ों की हिनहिनाहट की मधुर ध्वनि, मतवाले हाथियों की तुरही और रथों की बड़ी-बड़ी घरघराहट - ये सब सुनाई नहीं देतीं।
 
‘The voices of the fine riders, the sweet sound of the neighing of the horses, the trumpeting of the drunken elephants and the great rattling of the chariots – all these cannot be heard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)