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श्लोक 2.114.19  |
किं नु खल्वद्य गम्भीरो मूर्च्छितो न निशाम्यते।
यथापुरमयोध्यायां गीतवादित्रनि:स्वन:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| अब अयोध्या में पहले की तरह नाच-गाने की गम्भीर ध्वनियाँ नहीं सुनाई देतीं; यह कितना दुःखद है!॥19॥ |
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| 'Now the deep sounds of singing and dancing cannot be heard all around Ayodhya as before; how sad it is!॥ 19॥ |
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