Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.114.13: वहाँ के व्यापारी और व्यापारी शोक से व्याकुल हो रहे थे, बाजार और दुकानें भी नहीं खुल रही थीं। उस समय सारा नगर ऐसा उदास लग रहा था जैसे आकाश में बादल छा गए हों और चन्द्रमा और तारे ढक गए हों॥13॥ | ramayan सर्ग 2.114: भरत के द्वारा अयोध्या की दुरवस्था का दर्शन तथा अन्तःपुर में प्रवेश करके भरत का दुःखी होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ के व्यापारी और व्यापारी शोक से व्याकुल हो रहे थे, बाजार और दुकानें भी नहीं खुल रही थीं। उस समय सारा नगर ऐसा उदास लग रहा था जैसे आकाश में बादल छा गए हों और चन्द्रमा और तारे ढक गए हों॥13॥
The merchants and traders there were bewildered due to grief, the markets and shops were hardly open. At that time the whole city looked as gloomy as the sky where clouds have gathered and the stars and the moon are covered.॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥