श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.113.8 
एवमुक्त: स तु ततो भरद्वाजेन धीमता।
प्रत्युवाच भरद्वाजं भरतो धर्मवत्सल: ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब बुद्धिमान् भरद्वाजजी ने ऐसा पूछा, तब धर्मप्रेमी भरत ने उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया-॥8॥
 
When the wise Bharadwajji asked this, Bharata, who loved religion, answered him thus -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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