श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.113.5 
अदूराच्चित्रकूटस्य ददर्श भरतस्तदा।
आश्रमं यत्र स मुनिर्भरद्वाज: कृतालय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
चित्रकूट से थोड़ी दूर जाने पर भरत को वह आश्रम दिखाई दिया जहाँ भारद्वाज ऋषि रहते थे।*॥5॥
 
After going a little distance from Chitrakoot, Bharata saw the hermitage where the sage Bharadwaj used to live.*॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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