Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.113.24-25: ‘सारथि सुमन्त्रजी! देखो, अयोध्या की सारी शोभा नष्ट हो गई है; इसलिए उसमें पहले जैसी चमक नहीं रही। उसका सुन्दर रूप, उसका आनन्द चला गया है। इस समय वह अत्यन्त दुःखी और मौन हो रही है।’॥24-25॥ | ramayan सर्ग 2.113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘सारथि सुमन्त्रजी! देखो, अयोध्या की सारी शोभा नष्ट हो गई है; इसलिए उसमें पहले जैसी चमक नहीं रही। उसका सुन्दर रूप, उसका आनन्द चला गया है। इस समय वह अत्यन्त दुःखी और मौन हो रही है।’॥24-25॥
‘Summantraji, the charioteer! Look, all the beauty of Ayodhya has been destroyed; hence it does not shine like before. Its beautiful form, its joy has gone. At this time it is becoming very sad and silent.’॥ 24-25॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रयोदशाधिकशततम: सर्ग:॥ ११३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें एक सौ तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ११३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥