अनृण: स महाबाहु: पिता दशरथस्तव।
यस्य त्वमीदृश: पुत्रो धर्मात्मा धर्मवत्सल:॥ १७॥
अनुवाद
‘तुम्हारे पिता महाबाहु राजा दशरथ तुम्हारे समान धर्मपरायण और धर्मात्मा पुत्र पाकर सब प्रकार से ऋणी हो गए हैं।’ 17॥
'Your father, the mighty-armed king Dashrath, has become indebted in every way, having a son like you who is a lover of religion and a pious person.' 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥