श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.113.15 
एतच्छ्रुत्वा शुभं वाक्यं भरतस्य महात्मन:।
भरद्वाज: शुभतरं मुनिर्वाक्यमुदाहरत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महात्मा भरत के ये शुभ वचन सुनकर ऋषि भरद्वाज ने यह अत्यंत शुभ बात कही -॥15॥
 
On hearing these auspicious words of Mahatma Bharat, the sage Bharadwaj said the following extremely auspicious thing -॥15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd