श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 113: भरत का भरद्वाज से मिलते हुए अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.113.11 
एवमुक्तो महाप्राज्ञो वसिष्ठ: प्रत्युवाच ह।
वाक्यज्ञो वाक्यकुशलं राघवं वचनं महत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर विषय का सार समझने वाले बुद्धिमान वसिष्ठजी ने वार्तालाप में कुशल श्री रघुनाथजी से यह महत्त्वपूर्ण बात कही-॥11॥
 
When he said this, the wise Vasishtha, who understood the essence of the matter, told this important thing to Sri Raghunath, who was skilled in conversation -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)