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श्लोक 2.113.10  |
पितु: प्रतिज्ञां तामेव पालयिष्यामि तत्त्वत:।
चतुर्दश हि वर्षाणि या प्रतिज्ञा पितुर्मम॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘मैं अपने पिता द्वारा दी गई प्रतिज्ञा कि मैं चौदह वर्ष तक वन में रहूँगा, उसे यथार्थ रूप से पूरा करूँगा।’॥10॥ |
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| 'I will truly fulfill the promise made by my father that I will stay in the forest for fourteen years.'॥ 10॥ |
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