श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 112: ऋषियों का भरत को श्रीराम की आज्ञा के अनुसार लौट जाने की सलाह देना, भरत का पुनः प्रार्थना करना, श्रीराम का उन्हें चरणपादुका देकर विदा करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.112.9 
त्रस्तगात्रस्तु भरत: स वाचा सज्जमानया।
कृताञ्जलिरिदं वाक्यं राघवं पुनरब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु भरत का सारा शरीर काँप उठा। लड़खड़ाती हुई जीभ और हाथ जोड़कर वे श्री रामचन्द्रजी से बोले-॥9॥
 
But Bharata's whole body trembled. With a faltering tongue and folded hands he spoke to Shri Ramchandraji -॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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