श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 112: ऋषियों का भरत को श्रीराम की आज्ञा के अनुसार लौट जाने की सलाह देना, भरत का पुनः प्रार्थना करना, श्रीराम का उन्हें चरणपादुका देकर विदा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.112.4 
ततस्त्वृषिगणा: क्षिप्रं दशग्रीववधैषिण:।
भरतं राजशार्दूलमित्यूचु: संगता वच:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दशग्रीव रावण को मारने की इच्छा रखने वाले ऋषियों ने मिलकर राजा भरत से यह बात कही -॥4॥
 
Thereafter the sages who desired to kill Dashagriva Ravana together told this to the king Bharata -॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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