श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 112: ऋषियों का भरत को श्रीराम की आज्ञा के अनुसार लौट जाने की सलाह देना, भरत का पुनः प्रार्थना करना, श्रीराम का उन्हें चरणपादुका देकर विदा करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.112.22 
सोऽधिरुह्य नरव्याघ्र: पादुके व्यवमुच्य च।
प्रायच्छत् सुमहातेजा भरताय महात्मने॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली नरसिंह श्री राम उन पादुकाओं पर चढ़ गये और उन्हें पुनः अलग करके महात्मा भरत को सौंप दिया।
 
Then the mighty man-lion Sri Rama climbed upon those sandals and separated them again and handed them over to Mahatma Bharat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)