श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 112: ऋषियों का भरत को श्रीराम की आज्ञा के अनुसार लौट जाने की सलाह देना, भरत का पुनः प्रार्थना करना, श्रीराम का उन्हें चरणपादुका देकर विदा करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.112.21 
अधिरोहार्य पादाभ्यां पादुके हेमभूषिते।
एते हि सर्वलोकस्य योगक्षेमं विधास्यत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'आर्य! ये दो स्वर्ण-मंडित पादुकाएँ आपके चरणों में अर्पित हैं। कृपया इन पर अपने चरण रखें। ये समस्त जगत का कल्याण करेंगी।'॥21॥
 
'Arya! These two golden-decorated sandals are offered at your feet. Please place your feet on them. These will ensure the welfare of the entire world.'॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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