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श्लोक 2.111.3  |
पिता ह्येनं जनयति पुरुषं पुरुषर्षभ।
प्रज्ञां ददाति चाचार्यस्तस्मात् स गुरुरुच्यते॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘पुरुषप्रवर! पिता मनुष्य के शरीर की रचना करता है, इसलिए वह गुरु है और आचार्य उसे ज्ञान देता है, इसलिए वह गुरु कहलाता है॥3॥ |
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| ‘Purushpravar! The father creates the body of the man, hence he is the Guru and the Acharya gives him knowledge, hence he is called Guru. 3॥ |
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