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ramayan 2.111.3: ‘पुरुषप्रवर! पिता मनुष्य के शरीर की रचना करता है, इसलिए वह गुरु है और आचार्य उसे ज्ञान देता है, इसलिए वह गुरु कहलाता है॥3॥   |   ramayan सर्ग 2.111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.111.3 
पिता ह्येनं जनयति पुरुषं पुरुषर्षभ।
प्रज्ञां ददाति चाचार्यस्तस्मात् स गुरुरुच्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘पुरुषप्रवर! पिता मनुष्य के शरीर की रचना करता है, इसलिए वह गुरु है और आचार्य उसे ज्ञान देता है, इसलिए वह गुरु कहलाता है॥3॥
 
‘Purushpravar! The father creates the body of the man, hence he is the Guru and the Acharya gives him knowledge, hence he is called Guru. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)