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श्लोक 2.111.28  |
विक्रीतमाहितं क्रीतं यत् पित्रा जीवता मम।
न तल्लोपयितुं शक्यं मया वा भरतेन वा॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| 'मेरे पिता ने अपने जीवनकाल में जो कुछ बेचा, सौंपा या खरीदा है, उसे न तो मैं और न ही भरत पलट सकते हैं।॥ 28॥ |
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| 'Whatever my father has sold, entrusted or purchased during his lifetime, neither I nor Bharat can reverse it.॥ 28॥ |
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