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श्लोक 2.111.27  |
धर्मात्मा तस्य सत्येन भ्रातुर्वाक्येन विस्मित:।
उवाच राम: सम्प्रेक्ष्य पौरजानपदं जनम्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| धर्मात्मा राम अपने भाई भरत के इस सत्य कथन से आश्चर्यचकित हो गए और नगर तथा राज्य के लोगों की ओर देखकर बोले-॥27॥ |
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| The virtuous Rama was astonished at this true statement of his brother Bharat. Looking at the people of the city and the kingdom he said -॥ 27॥ |
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