श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.111.23 
एतच्चैवोभयं श्रुत्वा सम्यक् सम्पश्य राघव।
उत्तिष्ठ त्वं महाबाहो मां च स्पृश तथोदकम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! मेरे और उनके वचनों को सुनो और उन पर भली-भाँति विचार करो। महाबाहो! अब शीघ्र उठो और मुझे तथा जल को स्पर्श करो।'॥23॥
 
‘Raghunandan! Listen to both my and his words and think over them properly. Mahabaho! Now get up quickly and touch me and the water.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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