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श्लोक 2.111.23  |
एतच्चैवोभयं श्रुत्वा सम्यक् सम्पश्य राघव।
उत्तिष्ठ त्वं महाबाहो मां च स्पृश तथोदकम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| 'रघुनन्दन! मेरे और उनके वचनों को सुनो और उन पर भली-भाँति विचार करो। महाबाहो! अब शीघ्र उठो और मुझे तथा जल को स्पर्श करो।'॥23॥ |
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| ‘Raghunandan! Listen to both my and his words and think over them properly. Mahabaho! Now get up quickly and touch me and the water.'॥ 23॥ |
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