श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.111.22 
तेषामाज्ञाय वचनं रामो वचनमब्रवीत्।
एवं निबोध वचनं सुहृदां धर्मचक्षुषाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उन ग्रामवासियों के वचनों का अर्थ समझकर श्री राम ने भरत से कहा - 'भरत! धर्म पर दृष्टि रखने वाले मित्रों का यह कथन सुनो और समझो॥22॥
 
Understanding the meaning of the words of those villagers, Shri Ram said to Bharat - 'Bharat! Listen and understand this statement of friends who have an eye on religion. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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