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तेषामाज्ञाय वचनं रामो वचनमब्रवीत्।
एवं निबोध वचनं सुहृदां धर्मचक्षुषाम्॥ २२॥
अनुवाद
उन ग्रामवासियों के वचनों का अर्थ समझकर श्री राम ने भरत से कहा - 'भरत! धर्म पर दृष्टि रखने वाले मित्रों का यह कथन सुनो और समझो॥22॥
Understanding the meaning of the words of those villagers, Shri Ram said to Bharat - 'Bharat! Listen and understand this statement of friends who have an eye on religion. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥