श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.111.19 
आसीनस्त्वेव भरत: पौरजानपदं जनम्।
उवाच सर्वत: प्रेक्ष्य किमार्यं नानुशासथ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वहाँ बैठे हुए भरत ने चारों ओर देखकर नगर और क्षेत्रवासियों से कहा - 'तुम लोग भाई को समझाते क्यों नहीं?'॥19॥
 
On hearing this, Bharata, sitting there, looked around and said to the people of the city and the region - 'Why don't you people make brother understand?'॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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