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ramayan 2.111.17: 'ब्राह्मण एक ओर लेटकर और विरोध करके लोगों को अन्याय करने से रोक सकता है, परन्तु राजा बनने वाले क्षत्रियों के लिए ऐसा करना नियम नहीं है।॥17॥   |   ramayan सर्ग 2.111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.111.17 
ब्राह्मणो ह्येकपार्श्वेन नरान् रोद‍्धुमिहार्हति।
न तु मूर्धाभिषिक्तानां विधि: प्रत्युपवेशने॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'ब्राह्मण एक ओर लेटकर और विरोध करके लोगों को अन्याय करने से रोक सकता है, परन्तु राजा बनने वाले क्षत्रियों के लिए ऐसा करना नियम नहीं है।॥17॥
 
'A Brahmin can stop people from doing injustice by lying on one side and protesting, but it is not the rule for Kshatriyas who are about to be anointed as kings to do so.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)