Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.111.12: जब श्री रामचन्द्रजी ने ऐसा कहा, तब चौड़ी छाती वाले भरत अत्यन्त दुःखी हो गए। उन्होंने पास बैठे हुए सारथि सुमन्तराम से कहा-॥12॥   |   ramayan सर्ग 2.111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.111.12 
एवमुक्तस्तु रामेण भरत: प्रत्यनन्तरम्।
उवाच विपुलोरस्क: सूतं परमदुर्मना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब श्री रामचन्द्रजी ने ऐसा कहा, तब चौड़ी छाती वाले भरत अत्यन्त दुःखी हो गए। उन्होंने पास बैठे हुए सारथि सुमन्तराम से कहा-॥12॥
 
When Shri Ramchandraji said this, the broad-chested Bharata became very sad. He said to the charioteer Sumantram who was sitting nearby -॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)