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ramayan 2.111.11: ‘इसलिए मेरे पिता महाराज दशरथ ने मुझे जो भी आदेश दिया है, वह मिथ्या नहीं होगा।’ ॥11॥   |   ramayan सर्ग 2.111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.111.11 
स हि राजा दशरथ: पिता जनयिता मम।
आज्ञापयन्मां यत् तस्य न तन्मिथ्या भविष्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘इसलिए मेरे पिता महाराज दशरथ ने मुझे जो भी आदेश दिया है, वह मिथ्या नहीं होगा।’ ॥11॥
 
'Therefore whatever order my biological father Maharaja Dasharatha has given me will not be false.' ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)