श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 111: श्रीराम को पिता की आज्ञा के पालन से विरत होते न देख भरत का धरना देने को तैयार होना तथा श्रीराम का उन्हें समझाकर अयोध्या लौटने की आज्ञा देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.111.1 
वसिष्ठ: स तदा राममुक्त्वा राजपुरोहित:।
अब्रवीद् धर्मसंयुक्तं पुनरेवापरं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजपुरोहित वसिष्ठजी ने उपर्युक्त वचन कहकर पुनः श्री रामजी से अन्य धर्मयुक्त वचन कहे-॥1॥
 
At that time the royal priest Vasishtha, after having said the above words, again spoke other righteous words to Sri Rama -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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