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ramayan 2.110.4: 'इसके बाद भगवान विष्णु के रूप में ब्रह्मा ने स्वयं वराह रूप में प्रकट होकर इस पृथ्वी को जल से बाहर निकाला और अपने वरद पुत्रों के साथ इस सम्पूर्ण जगत की रचना की॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.110.4 
स वराहस्ततो भूत्वा प्रोज्जहार वसुंधराम्।
असृजच्च जगत् सर्वं सह पुत्रै: कृतात्मभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'इसके बाद भगवान विष्णु के रूप में ब्रह्मा ने स्वयं वराह रूप में प्रकट होकर इस पृथ्वी को जल से बाहर निकाला और अपने वरद पुत्रों के साथ इस सम्पूर्ण जगत की रचना की॥4॥
 
'After this, Brahma in the form of Lord Vishnu himself appeared in the form of Varaha, took out this earth from the water and created this entire world with his blessed sons. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)