श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.110.36 
इक्ष्वाकूणां हि सर्वेषां राजा भवति पूर्वज:।
पूर्वजे नावर: पुत्रो ज्येष्ठो राजाभिषिच्यते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'सभी इक्ष्वाकु कुलों में ज्येष्ठ पुत्र ही राजा होता आया है। ज्येष्ठ पुत्र होने पर भी छोटा पुत्र राजा नहीं बनता। ज्येष्ठ पुत्र ही राजा पद पर अभिषिक्त होता है।॥36॥
 
‘In all the Ikshwaku clans, the eldest son has always been the king. Despite having an eldest son, the younger son does not become the king. Only the eldest son is anointed as the king.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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