श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.110.35 
तस्य ज्येष्ठोऽसि दायादो राम इत्यभिविश्रुत:।
तद् गृहाण स्वकं राज्यमवेक्षस्व जगन्नृप॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
आप दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र हैं, जो 'श्री राम' नाम से विख्यात हैं। हे मनुष्यों के स्वामी! यह अयोध्या का राज्य आपका है, इसे स्वीकार कीजिए और इसकी देखभाल करते रहिए॥ 35॥
 
'You are the eldest son of Dasharath, who is famous by the name of 'Shri Ram'. O Lord of men! This kingdom of Ayodhya is yours, accept it and keep looking after it.॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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