श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.110.34 
अजश्च सुव्रतश्चैव नाभागस्य सुतावुभौ।
अजस्य चैव धर्मात्मा राजा दशरथ: सुत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
नाभाग के दो पुत्र थे- अज और सुव्रत। उनके धर्मात्मा पुत्र राजा दशरथ थे।
 
‘Naabhaga had two sons- Aja and Suvrata. His righteous son was King Dasharatha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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