श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.110.33 
अम्बरीषस्य पुत्रोऽभून्नहुष: सत्यविक्रम:।
नहुषस्य च नाभाग: पुत्र: परमधार्मिक:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'अम्बरीष के पुत्र नहुष थे, जो सच्चे पराक्रमी थे। नहुष के पुत्र, जो अत्यन्त धर्मात्मा थे, असफल हो गये ॥33॥
 
'Ambarish's son was Nahusha, a man of true valor. Nahusha's son, who was a very religious person, failed. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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