श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.110.32 
शीघ्रगस्य मरु: पुत्रो मरो: पुत्र: प्रशुश्रुव:।
प्रशुश्रुवस्य पुत्रोऽभूदम्बरीषो महामति:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'शिघ्राग के पुत्र मरु हुए, मरु के पुत्र प्रशुश्रुव हुए और प्रशुश्रुव के अत्यन्त बुद्धिमान पुत्र अम्बरीष हुए ॥32॥
 
'Shighrag's son was Maru, Maru's son was Prashushruv and Prashushruv's very intelligent son was Ambarish. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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