श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.110.31 
शङ्खणस्य तु पुत्रोऽभूच्छूर: श्रीमान् सुदर्शन:।
सुदर्शनस्याग्निवर्ण अग्निवर्णस्य शीघ्रग:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'शंखण के वीर पुत्र श्री सुदर्शन हुए। सुदर्शन के पुत्र अग्निवर्ण और अग्निवर्ण के पुत्र श्रद्धाग थे।
 
'Shankhan's brave son became Mr. Sudarshan. Sudarshan's sons were Agnivarna and Agnivarna's sons were Shraddhaga.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas