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ramayan 2.110.30: 'हमने सुना है कि कल्माषपाद का शंखण नाम का एक पुत्र था, जो युद्ध में अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध होने पर भी अपनी सेना सहित नष्ट हो गया।   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.110.30 
कल्माषपादपुत्रोऽभूच्छङ्खणस्त्विति न: श्रुतम्।
यस्तु तद्वीर्यमासाद्य सहसैन्यो व्यनीनशत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'हमने सुना है कि कल्माषपाद का शंखण नाम का एक पुत्र था, जो युद्ध में अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध होने पर भी अपनी सेना सहित नष्ट हो गया।
 
'We have heard that Kalmashpada had a son named Shankhan who, despite being renowned for his valour in war, was destroyed along with his army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)