श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.110.3 
सर्वं सलिलमेवासीत् पृथिवी तत्र निर्मिता।
तत: समभवद् ब्रह्मा स्वयंभूर्दैवतै: सह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सृष्टि के प्रारम्भ में सब कुछ जल था। उसी जल के भीतर पृथ्वी की उत्पत्ति हुई। तत्पश्चात् देवताओं सहित स्वयंभू ब्रह्मा प्रकट हुए॥3॥
 
‘At the beginning of the creation, everything was water. The earth was created within that water. Thereafter, the self-born Brahma appeared along with the gods.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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