श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.110.28 
भगीरथात् ककुत्स्थश्च काकुत्स्था येन तु स्मृता:।
ककुत्स्थस्य तु पुत्रोऽभूद् रघुर्येन तु राघवा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगीरथ ने ककुत्स्थ को जन्म दिया, जिससे उनके वंशज 'ककुत्स्थ' कहलाए। ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, जिससे उस वंश के लोग 'राघव' कहलाए।॥28॥
 
Bhagiratha gave birth to Kakutstha, due to which his descendants are called 'Kakutstha'. Kakutstha's son was Raghu, due to which the people of that dynasty are called 'Raghav'.॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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