श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.110.27 
अंशुमानपि पुत्रोऽभूदसमञ्जस्य वीर्यवान्।
दिलीपोंऽशुमत: पुत्रो दिलीपस्य भगीरथ:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
असमंज के पुत्र अंशुमान हुए, जो बड़े वीर थे। अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए और दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए ॥27॥
 
'Asamanja's son was Anshuman, who was very brave. Anshuman had Dilip and Dilip's son was Bhagiratha. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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