श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.110.20 
भार्गवश्च्यवनो नाम हिमवन्तमुपाश्रित:।
तमृषिं साभ्युपागम्य कालिन्दी त्वभ्यवादयत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'उन दिनों भृगुवंशी च्यवन ऋषि हिमालय पर रहते थे। राजा असित की कालिन्दी नामक पत्नी ने ऋषि के चरणों में पहुँचकर उन्हें प्रणाम किया। 20॥
 
'In those days, Bhriguvanshi sage Chyavan lived in the Himalayas. King Asita's wife named Kalindi reached the sage's feet and bowed to him. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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