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तांस्तु सर्वान् प्रतिव्यूह्य युद्धे राजा प्रवासित:।
स च शैलवरे रम्ये बभूवाभिरतो मुनि:॥ १७॥
अनुवाद
उनका सामना करने के लिए सेना बनाकर युद्ध में डटे रहने पर भी शत्रुओं की अधिकता के कारण राजा असित को परास्त होकर पराए देश में शरण लेनी पड़ी। वे एक सुन्दर पर्वत शिखर पर सुखपूर्वक रहने लगे और ऋषि की भाँति ईश्वर का ध्यान करने लगे।
‘Even after forming an army to face them and standing firm for the war, King Asit was defeated due to the large number of enemies and had to take refuge in a foreign land. He stayed happily on a beautiful mountain peak and started meditating on God like a sage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥