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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना
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श्लोक 14
श्लोक
2.110.14
मान्धातुस्तु महातेजा: सुसंधिरुदपद्यत।
सुसंधेरपि पुत्रौ द्वौ ध्रुवसंधि: प्रसेनजित्॥ १४॥
अनुवाद
'मान्धाता के महान और तेजस्वी पुत्र सुसन्धि हुए। सुसन्धि के दो पुत्र थे- ध्रुवसन्धि और प्रसेनजित। 14॥
'Mandhata's great and brilliant son became Susandhi. Susandhi had two sons – Dhruvasandhi and Prasenjit. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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