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ramayan 2.110.13: 'धुन्धुमार से एक अत्यंत तेजस्वी युवक का जन्म हुआ। युवनाश्व के पुत्र श्री मान्धाता हुए। 13॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.110.13 
धुन्धुमारान्महातेजा युवनाश्वो व्यजायत।
युवनाश्वसुत: श्रीमान् मान्धाता समपद्यत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'धुन्धुमार से एक अत्यंत तेजस्वी युवक का जन्म हुआ। युवनाश्व के पुत्र श्री मान्धाता हुए। 13॥
 
'From Dhundhumara was born a very brilliant young man. Yuvanashva's son became Mr. Mandhata. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)