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श्लोक 2.110.13  |
धुन्धुमारान्महातेजा युवनाश्वो व्यजायत।
युवनाश्वसुत: श्रीमान् मान्धाता समपद्यत॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| 'धुन्धुमार से एक अत्यंत तेजस्वी युवक का जन्म हुआ। युवनाश्व के पुत्र श्री मान्धाता हुए। 13॥ |
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| 'From Dhundhumara was born a very brilliant young man. Yuvanashva's son became Mr. Mandhata. 13॥ |
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