श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.110.12 
स सत्यवचनाद् वीर: सशरीरो दिवं गत:।
त्रिशङ्कोरभवत् सूनुर्धुन्धुमारो महायशा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘विश्वामित्र के सत्य वचनों के प्रभाव से वे वीर त्रिशंकु सशरीर स्वर्गलोक को चले गए थे। त्रिशंकु के महान योद्धा प्रसिद्ध हुए ॥12॥
 
‘That brave Trishanku had gone to heaven physically due to the influence of the true words of Vishwamitra. The great warriors of Trishanku became famous. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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