श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.110.11 
अनरण्यान्महाराज पृथू राजा बभूव ह।
तस्मात् पृथोर्महातेजास्त्रिशङ्कुरुदपद्यत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! अनरण्य से राजा पृथु उत्पन्न हुए। उसी पृथु से महाबली त्रिशंकुकि उत्पन्न हुए।
 
‘Maharaj! From Anaranya came King Prithu. From that Prithu was born the mighty Trishankuki.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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