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श्लोक 2.110.11  |
अनरण्यान्महाराज पृथू राजा बभूव ह।
तस्मात् पृथोर्महातेजास्त्रिशङ्कुरुदपद्यत॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| 'महाराज! अनरण्य से राजा पृथु उत्पन्न हुए। उसी पृथु से महाबली त्रिशंकुकि उत्पन्न हुए। |
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| ‘Maharaj! From Anaranya came King Prithu. From that Prithu was born the mighty Trishankuki. |
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