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ramayan 2.110.10: 'सत्पुरुषों में श्रेष्ठ महाराज अनरण्य के राज्य में कभी अनावृष्टि नहीं हुई, कभी दुर्भिक्ष नहीं पड़ा और न ही कभी कोई चोर उत्पन्न हुआ॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.110: वसिष्ठजी का ज्येष्ठ के ही राज्याभिषेक का औचित्य सिद्ध करना और श्रीराम से राज्य ग्रहण करने के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.110.10 
नानावृष्टिर्बभूवास्मिन् न दुर्भिक्ष: सतां वरे।
अनरण्ये महाराजे तस्करो वापि कश्चन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'सत्पुरुषों में श्रेष्ठ महाराज अनरण्य के राज्य में कभी अनावृष्टि नहीं हुई, कभी दुर्भिक्ष नहीं पड़ा और न ही कभी कोई चोर उत्पन्न हुआ॥10॥
 
'In the kingdom of Maharaja Anaranya, the best among good men, there was never any drought, no famine and no thief was ever born.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)