श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.11.3 
प्रतिज्ञां प्रतिजानीष्व यदि त्वं कर्तुमिच्छसि।
अथ ते व्याहरिष्यामि यथाभिप्रार्थितं मया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'यदि तुम इसे पूरा करना चाहते हो, तो प्रतिज्ञा करो। उसके बाद मैं तुम्हें अपना वास्तविक अभिप्राय बताऊँगा।'॥3॥
 
'If you want to fulfil it, then take the vow. After that I will tell you my real intention.'॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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