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श्लोक 2.11.29  |
स राजराजो भव सत्यसंगर:
कुलं च शीलं च हि जन्म रक्ष च।
परत्र वासे हि वदन्त्यनुत्तमं
तपोधना: सत्यवचो हितं नृणाम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| 'तुम राजाओं के राजा हो; अतः सत्य बोलो और उस सत्य से अपने कुल, चरित्र और जीवन की रक्षा करो। तपस्वी पुरुष कहते हैं कि सत्य बोलना ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है। परलोक में रहने पर यह मनुष्यों के लिए अत्यंत कल्याणकारी होता है।॥29॥ |
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| ‘You are the king of kings; therefore, be truthful and protect your family, character and life by that truth. The ascetic men say that speaking the truth is the best religion. It is extremely beneficial for humans when it resides in the other world.॥ 29॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे एकादश: सर्ग:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें ग्यारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ११॥ |
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