श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  2.11.26-27 
नव पञ्च च वर्षाणि दण्डकारण्यमाश्रित:॥ २६॥
चीराजिनधरो धीरो रामो भवतु तापस:।
भरतो भजतामद्य यौवराज्यमकण्टकम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'धीरज स्वभाव वाले श्री राम ने तपस्वी का वेश धारण किया, वल्कल और मृगचर्म धारण किया और दण्डकारण्य में चौदह वर्ष तक रहे। आज भरत को निःसंदेह राजकुमार की पदवी प्राप्त हो ॥26-27॥
 
'Shri Ram, having a patient nature, disguised himself as an ascetic, wore valkal and deer skin and stayed in Dandakaranya for fourteen years. May Bharat get the title of prince without any doubt today. 26-27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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