श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 11: कैकेयी का राजा को दो वरों का स्मरण दिलाकर भरत के लिये अभिषेक और राम के लिये चौदह वर्षों का वनवास माँगना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.11.18 
स्मर राजन् पुरा वृत्तं तस्मिन् देवासुरे रणे।
तत्र त्वां च्यावयच्छत्रुस्तव जीवितमन्तरा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! उस पुरानी घटना का स्मरण करो, जब देवताओं और दानवों में युद्ध हो रहा था। वहाँ शत्रुओं ने तुम्हें घायल करके गिरा दिया था, परन्तु तुम्हारे प्राण नहीं लिये थे॥18॥
 
‘King! Remember that old incident when the war between gods and demons was going on. There the enemy had wounded you and made you fall, but did not take your life.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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